Day 8, Answer Writing Practice,10th January, 2017 26


  1. The 2016 transgender Bill is the product of an uninterested and insincere attempt at lawmaking. Comment
  2. It was our myth that we share shared vision with china at multilateral platform, China recent actions broke that myth. Comment
  3. World today seems more disoriented and more instable. And there is no end to chaos in the near future. Discuss this also from India’s Perspective.
  4. In the context of Threat by petroleum dealer to stop accepting the debit and credit cards. What are the issues involved in digital transaction
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  • Rahul Mishra

    विश्व आज के समय कुछ ज्यादा अव्यवस्था के दौर में चल रहा है चाहे वह मध्य पूर्व में जारी संकट हो यूरोप में पलायन संकट या दुनिया के कुछ प्रमुख राष्ट्रीय में उग्र राष्ट्रवाद का जन्म हो यह सारे तत्व है जिन्होंने विश्व को अवस्था की दौड़ में ले गई है।
    अव्यवस्था के कुछ प्रमुख कारण
    (क) शक्ति असंतुलन एवं आतंकी गतिविधि :-
    1. मध्य पूर्व में जारी संकट -सिरिया, इराक
    2. यूरोप में शरणार्थी संकट
    3. Isis अल शबाब हिजबुल्ला जैसे आतंकी संगठन द्वारा लोन वुल्फ अटैक अमेरिका ब्रिटेन एवं फ्रांस जैसे राष्ट्रों में उग्र राष्ट्रवाद का जन्म दक्षिण चीन सागर में चीन की उग्र नीति एवं एशिया में साम्राज्यवादी प्रसार उत्तरी अमेरिका पाकिस्तान के द्वारा परमाणु हमले की धमकी
    (ख) आर्थिक अव्यवस्थितकरण

    1.अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति द्वारा संरक्षणवादी सिद्धांत
    2. ब्रेक्सिट के कारण यूरोपीय संघ पर प्रतिकूल प्रभाव
    3.ओपेक राष्ट्रों के द्वारा पेट्रोल के उत्पादन पर कमी
    4. कुछ प्रमुख अर्थवस्था द्वारा अपने करेंसी को कम करना
    5.वैश्विक अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर में 6.गिरावट चीन अमेरिका में ट्रेड वार
    भारत पर प्रभाव:-
    1. मध्य पूर्व एशिया में संकट से भारतीय कामगारों को समस्या
    2. यूरोप में शरणार्थी समस्या से युरोपियन राष्ट्र द्वारा वीजा नीति का सख्त पालन
    3. isis अल शबाब जैसे आतंकी संगठन द्वारा विचारधारा का प्रसार भारत में देखने को मिला
    4. अमेरिका फ्रांस ब्रिटेन जैसे राष्ट्रों के उग्र राष्ट्रवाद के कारण व्यापार एवं सांस्कृतिक रिश्ते पर असर
    5. चीन के उग्र नीति के कारण एशिया में शक्ति असंतुलन की समस्या
    6. ओपेक के कारण तेलों में दाम में वृद्धि
    7.पाकिस्तान के द्वारा असंतुलनकरी नीति का पालन
    8.अफगानिस्तान में रूस ,अमेरिका चीन के बीच जारी संधि से भारत के हित अफगनिस्तान में प्रभावीत

    जरूरत है हमें अपने राष्ट्र की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जाए धार्मिक सदभाव बनाते हुए आर्थिक संरचना तंत्र को मजबूती प्रदान की जाए।

    • Vishwender

      ultimate specially sub classification of reasons for unstability

    • Rahul Kumar

      Dispute between countries over terrorism can be one point…
      If I am right…

    • Devanampriya Priyadarsi

      क — उत्तरी कोरिया का एक पॉइंट छूट गया
      very well written
      kwkr…….

      • Rahul Mishra

        P0int number 6 whi hai lekin glti se उतरी अमेरिका लिखा गया है।
        Hehe

  • Abhishek jha

    The 2016 Transgender bill is the product of an uninterested and insincere attempt at lawmaking. Comment

    INTRODUCTION:- “Transgender bill” , a bill which has formulated just in the favour of transgender people living in India. To enjoy the fundamental rights granted under the Constitution of India . So to stop the further harassment of the community of people ,who have been demoralizing since independence . Infact ,they never tested their fundamental rights except harassment nd molestation ,where ever they go just become a “bird of fun” . So just to stop the iniquity of them . Government tried to formulate a bill so they may equal rights with the common citizens of India. The rights of ” transgender people” has been in news since 2014 but a solid bill didn’t pass yet.
    In April 2014, NALSA(National Legal services authority ) v. Union of India which had declared that the transgender people to be the “third gender” affirmed that the fundamental rights granted under the Constitution of India will be equally applicable to the transgender and gave them right to self-identification of their gender as Male,female or third gender.This judgement was major step towards gender equality in India . Moreover,court also held that because transgender people were treated as socially nd economically backward classes , they will be granted reservation in admission to educational institutions nd jobs.And the court had given these directives to the government.
    In December 2014 ,Tiruch siva ,MP introduced the right of transgender bill ,2014 as private member’s bill . On April 2015 ,in rare instance ,the rajya sabha unanimously passed the bill.However it never made it to the lok sabha. Instead the government decided to get it’s own bill- -the transgender person bill 2015- it was largely based on 2014 bill.
    But government again drafted a transgender bill in 2016.Hv so many rough edges, which led to such radical changes in the new draft.previous research,consultations, draft nd judicial order stand completely ignored .
    1) The bill which defines the term “transgender person” inexplicably borrowed from the provision of Australian sex discrimination amendment.
    2) 2014& 2015 bill had more accurate definition of term transgender . Infact, 2015 bill had granted a transgender person the right to identify as either Male/ female or transgender.
    3) It has absence of provision on reservation running contrary to NALSA judgement.
    4) Bill is completely silent on how it’s content will impact the operation existing laws.

    CONCLUSION:- This all shows that it has completely disregarded transgender people.Now this bill will be referred to the standing committee.
    However,most important nd interested in all these contents that none of the bill hv addressed the issue of section 377, which criminalizes all sex that is not between people of opposite gender.

  • Devanampriya Priyadarsi

    The 2016 transgender Bill is the product of an uninterested and insincere attempt at lawmaking. Comment
    ANS-
    भारत सरकार ने ट्रांसजेंडर वर्ग के कल्याण के लिए ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकररों कर सरां क्षण) बिल, 2016
    प्रस्तावित किया है

    इस विधेयक में निम्न कमियां है –
    1 इस विधेयक में ट्रांसजेंडर का वर्गीकरण ठीक से नही हुआ है यानि इसमें यह परिभासा दिया हुआ है की वह व्यक्ति जो न तो पुरुष हो और न ही औरत अर्थार्त ट्रांसजेंडर अपने आप को महिला या पुरुष से जोड़ कर नही देख सकते
    2 इस विधेयक में मुख्यतः उन बिंदुओं पर बल दिया गया है जो किसी भारतीय नागरिक को जन्म लेने के साथ ही मिल जाते है (समानता , शोषण के विरुद्ध अधिकार आदि ) अन्य की तरह ये भी पहले से ही भारत के नागरिक है अतः मूल अधिकार तो इनको पहले से ही प्राप्त है ।
    3 विभिन नागरिक संहिताओं में केवल दो लिंग का ही वर्णन है जैसे –गोद लेना , विवाह , संपत्ति अधिकार आदि । उस सन्दर्भ में कोई विशेष प्रावधान नही है
    4 अवसर की समानता के लिए कोई विशेष प्रावधान नही
    5 IPC की धारा 377 भी ट्रांसजेंडरों के लिए अनुचित है इस विधेयक में इसको सामिल नही किया गया है
    यक़ीनन ,
    सर्कार ने इस विधेयक में कुछ महत्व पूर्ण कदम उठाने का प्रयाश किये है जैसे —
    -राष्ट्रिय ट्रांसजेंडर परिषद् का गठन (जिसमे ट्रांसजेंडर समुदाय के भी पांच सदस्य शामिल हैं ) जो इनपर
    आवश्यकता अनुरूप नै नीतियां बनाएगी
    – इनके लिए अलग से
    रोजगार और पुनर्वास की सुविधाए
    लेकिन साथ ही साथ सरकार को
    -ट्रांसजेंडर को एक तीसरी श्रेणी में सामिल करने के साथ ही इनके लिए विशेष आरक्षण की सुविधा की प्रावधान करनी चाहिए ,
    – उच्चतम न्यायलय के 2014 के वाद नालसा बनाम भारत संघ के निर्देशों को लागू करना चाहिए या इस
    विधेयक में MSJE के मुख्य सिफारिसों को शामिल करना चाहिए
    -नागरिक संहिताओं में इनके लिए भी कानून होना चाहिए (उदहारण के लिए UK , आयरलैंड ,माल्टा आजादी देशों के नागरिक संहिताओं में इनके लिए भी कानून है )
    ,

    • Rahul Mishra

      प्रश्न के अंत कुछ टिपण्णी करे की समाज में ऐसे व्यक्ति की क्या भूमिका है जो समाज के मूलधारा में नही लोटे है। उनकी भूमिका पर थोड़ा प्रकाश डालें। संबिधान के कुछ अनुछेद का भी जिक्र करे value addition hota hai.
      प्रश्न के प्रारंभ में कुछ बेस तैयार करे
      Well written…

      • Devanampriya Priyadarsi

        बहुत बढ़िया
        ये पॉइंट्स जोड़े जा सकते थे
        thanks
        keep reviewing……..

  • Rahul Mishra

    It was our myth that we share shared vision with china at multilateral platform, China recent actions broke that myth. Comment

    हमने हमेशा से चीन पर इस बात की दबाव डालते रहे कि द्विपक्षीय मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए साझा हितों ,चिंताओं और प्राथमिकताओं पर ध्यान देना होगा ,परंतु हाल के घटनाक्रम ने कुछ ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जहां दोनों राष्ट्रों के बीच संबंधों पर नकारात्मक परिणाम पड़े हैं:
    चाइना के हित से अलग नजर आ रहे हैं:-
    1. बार बार न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में भारत की सदस्यता को रोकना
    2. आतंकवादी अजहर महमूद पर संयुक्त राष्ट्र सेन्सन कमिटी में वीटो
    3.भारत में बहने वाली ब्रहमपुत्र नदी पर बांध बनवाना
    4. सीपीसी को कश्मीर वाले क्षेत्रों से गुजरना
    5.दलाई लामा के भारत प्रवास पर आपत्ति
    6. चीन के द्वारा श्रीलंका एवं जिबूती एवं हाल ही में कराची में सबमरीन भेजना
    7.अग्नि 5 मिसाइल प्रक्षेपण के विरोध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विरोध करना
    8. भारतीय आईटी सेक्टर को चीन में खुली व्यापार करने का अधिकार नहीं देना जिससे व्यापार घाटा 2015 सेला में 53 बिलियन डॉलर के आस पास हो गया है

    हमने हमेशा से चीन की संप्रभुता एवम हित का सम्मान किया है
    1. वह तिब्बत के मामला हो ,वन चीन पॉलिसी हो इत्यादि
    2.हमने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को सबसे पहले मानयता दी
    3. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए समर्थन किया
    4.2001 में विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता पर भी चीन का समर्थन किया
    5.ए आई आई बैंको में वित्य सहायता हो।

    चीन की नीति से पता चलता है कि वह एशिया -प्रशांत में अकेला सुपर पावर बनना चाहता है उसके कार्य करने के गति भी काफी तेज है। उसकी अर्थव्यवस्था हमसे से 5 गुना बड़ी बड़ी है वह विदेशी पूंजी रिजर्व में हमसे से 10 गुना ज्यादा है। माना जाता है कि चीन संक्रमणकालीन सुपर पावर बनने के रास्ते पर है।
    चीन की नीतियों से स्पष्ट है कि वह अपने हित पर कार्य कर रहा है जरुरी है भारत को आपने अर्थव्यवस्था को मजबूत करें अपनी सैनिक छमता बढाए एवं अमेरिका के पाइवोट टू एशिया पॉलिसी के साथ सकारात्मक कदम उठाते रहे, रूस के साथ रक्षा व्यापर बढ़ाए एवम भारत की डेफ्फेन्स सेक्टर में स्वदेशी करन को प्रथिमिकता दे, क्योंकि चीन के बारे के बारे में कहा जाता है कि वह हमेशा शक्ति को ही सम्मान देता है।

    • Devanampriya Priyadarsi

      चीन की “मोतियों की माला ” नीति का जिक्र करे । ये भी बताएं की चीन का निवेश अफ्रीका जैसे देशों में भारत से चार गुना ज्यादा है ।

  • Yadvendra Singh

    Digital transaction means exchange of goods and services through Plastic Cards, M Wallets, online transaction and BHIM like apps. It discourages the use of Cash while exchanging goods and services.
    From barter system to digital transaction system, the Human being is going to an era where cash will be history. Government of India has initiated this step of encouraging digital transaction to curb corruption in public life, black money, terrorism, human trafficking, menace of drugs and danger of fake currency.
    In this context, the Government of India has issued a guidelines to all Petrol Pumps to use Plastic cards. However, Banks and Plastic Cards company also levy some charge for it. Therefore, the Petrol pump owners are reluctant to use of plastic cards due to loss of profit. As they also get 2-3% of commission on sale from the Oil companies.
    Not only that, they are also afraid of disclosing their daily sale to skip direct taxes.

    The main barrier in the way of encouraging digital transaction is that there is lack of digital literacy. People are also afraid of security of their transaction and card details.

  • SINHAVAHINI SINGH
  • SINHAVAHINI SINGH

    plz review ..

  • अमित अभिषेक

    It was our myth that we share shared vision with china at multilateral platform, China recent actions broke that myth. Comment.

    अंतराष्ट्रीय सम्बन्ध में बहुपक्षीय हो या द्विपक्षीय प्लेटफ़ॉर्म हर स्तर पर भारत ने चीन के साथ ये समझते हुए समेशा सकारात्मक रुख प्रदर्शित किया है कि एशिया क्षेत्र में भारत एवम् चीन के हित समान है। इसको निम्न परिप्रेक्ष्य में देख सकते है___

    *UNSC में खुद की जगह चीन की सदस्यता का समर्थन
    * नेहरू की आदर्शवादी विदेशनीति की दौर में हिन्दी -चीनी भाई-भाई की कोरी कल्पना
    * तिब्बत पर चीन के अधिकार को मान्यता देना
    * सीमा विवाद के बावजूद कई क्षेत्रीय संगठन में चीन के साथ साझीदार बनना
    *WTO जैसे वैश्विक मंच पर समान हिट के मुद्दे पर चीन का का समर्थन

    लेकिन इस मामले में अगर भारत के प्रति चीन की प्रतिक्रिया का खासकर 2016 के सन्दर्भ में विश्लेषण किया जाये तो भारत की सोच एक मिथक साबित होती नज़र आ रही है। इसको निम्न परिप्रेक्ष्य में समझ सकते हैं______

    * 1962 का युद्ध
    * अरुणाचल प्रदेश पर दावा एवम् भारतीय सीमा में सैनिक घुसपैठ
    *भारत के विरोध में पाकिस्तान को परमाणु तकनीक तथा अन्य सामरिक एवम् कूटनीतिक सहायता प्रदान करना।
    * NSG एवम् UNSC में भारत की सदस्यता का विरोध
    * आतंकवाद पर डबल स्टैंड जिसके तहत भारत की लाख प्रयासों के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी के लिस्ट में अज़हर मसूद के नाम का बचाव करना
    * दलाई लामा के भारतीय प्रवास पर आपत्ति जताना
    * मिशाइल परीक्षण का मुद्दा UN में उठाना
    * POK के रास्ते CPEC का विकास
    *विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से हिन्द महासागर में अपनी उपास्थि दर्ज करना…इत्यादि

    अतः भारत को यह समझना पड़ेगा कि वैश्विक परिदृश्य के बर्तमान दौर में अंतराष्ट्रीय सम्बन्ध भावनात्मकता के वजाय शक्तिसन्तुलन की कूटनीति से बनाए जाते है।अंततः शक्ति की ही पूजा होती है अतः भारत को अपनी आर्थिक-सामरिक शक्ति को बढ़ाना होगा। इस मामले में चीन अभी भारत से बहुत आगे है। हालांकि हाल के वर्षों में वैश्विक परिदृश्य में भारत की महत्ता को अमेरिका एवम् जापान जैसे देशों ने भी स्वीकारा है। भारत भी अब अपनी नीति में परिवर्तन ला रहा है जिसमें ब्रिक्स की जगह बिम्सटेक,IBSA,BIM जैसे संगठन को प्राथमिकता देना शामिल है।

    • sonu

      please write with proper spacing ..world and line is mixing with other…they may be one cause to attract less no in exam. please write with proper spacing. however, contest is good but not legible.

  • अमित अभिषेक

    Pls review my answer and suggest.

  • Vishwender
  • Vishwender
  • meenu

    can u clarify who is actually checking the answer.Becos so many answers are there

  • VISHAL SINHG

    NICE

  • Honey Sharma

    नमस्कार ओनली आईएस साईट का काम बहुत प्रसंसनीय है परन्तु आप की टीम प्रत्यक दिन के प्रश्नों का उत्तर आप भी पोस्ट करे जिससे हम लोगो को हमारी गलतियाँ पता चले कृपया सर इनके उत्तर भी प्रदशित करे ।
    धन्यवाद