Day 7, Answer Writing Practice,9 January, 2017 46


  1. Recent data published by the govt. shows the sluggish growth in our economy And even demonetization effect is not counted so far which may further worsens the situation. Comment
  2. Urban development ministry’s decision to ban the motor vehicles in inner line of CP of Delhi is welcome step. What other steps can be taken to decongest the cities in different states?
  3. Indian diaspora is disturbed into different parts of the world. Although it advances India’s interest in foreign countries but faces a lot of challenges also. Comment
  4. What are green bonds? How green bonds may be important tools to curb the climate change?
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  • Devanampriya Priyadarsi

    Recent data published by the govt. shows the sluggish growth in our economy And even demonetization effect is not counted so far which may further worsens the situation. Comment
    ans–

    किसी भी राष्ट्र की वृद्धि दर उसके सकल घरेलु उत्पाद(GDP) के वृद्धि दर के रूप में माप जाता है .जो की एक वर्ष में उस राष्ट्र के सभी उत्पादित बस्तुओं एवम सेवाओं का बाजारू मूल्य होता है । जीडीपी अर्तव्यवस्था के तीन क्षत्रको
    प्राथमिक(कृषि),द्वितीयक(उद्योग),तृतीयक(सेवा) का कुल योग होता है ।
    केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय(CSO) ने अपने आकलन में बताया है की मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 7.1% रहेगी जो पिछले साल 7.6% थी ।(हालाँकि यह आकलन पुरे वित्त वर्ष का न हो कर के सिर्फ अप्रैल से अक्टूबर तक का ही है )
    इस गिरावट के निम्नलिखित कारन हैं–
    1 उद्योग और सेवा क्षेत्र दोनों में गिरावट हुई है
    2 नोटबंदी की मार सबसे ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग पर पड़ी है इस कारन औद्योगिक उत्पादन सूचकांक( IIP ) में भी गिरावट हुई है
    3 GFCF यानि कुल निशित पूंजी निर्माण , जो की निवेश का सूचक माना जाता है ,में भी गिरावट हो रही है

    हालां की —
    नोटबंदी के चलते राजस्व जरूर बढ़ा है और अच्छे मानसून के चलते कृषि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है
    अतः जल्दी ही पुनः मुद्रीकरण को अभियान स्तर पर चलते हुए अन्य क्षत्रों में हुई गिरावट को काम करना होगा और CSO को सही आँकङे प्रस्तुत करना चाहिए,वास्तविक आंकड़ो से मेल न खाने पर इसके शेख पर भी आंच आ सकती है , इससे आवश्यकता अनुसार सुधार के लिए कई परिमाप उठाये
    जाते हैं ।

    • Rahul Mishra

      नोटबंदी का इसमे शामिल नही है । कारण 2 को देखे

      • Rahul Mishra

        मेरा review kre

        • Devanampriya Priyadarsi

          hmmm…
          thanks for reviewing

  • Raider

    Q1-CSO द्वारा जारी रिपोर्ट में सकल घरेलु उत्पाद बृद्धि दर में कमी ७.६ से ७.1 बताई गयी है और ये बेमुदर्रिकरण से पहले का डाटा है यानि अक्टूबर तक का,यानि स्थिति और भयावह होने की पूरी उम्मीद है.
    इसके कारण-
    कृषि बृद्धि दर बढ़ने के बावजूद इसपर प्रभाव नहीं डाल पाया क्यों इसका योगदान दूसरों के अपेक्षा काम है
    सेवा क्षेत्र के बृद्धि में कमी देखने को मिली है और इसका प्रभाव पड़ा है क्यों की ये आधा से ज्यादा योगदान देश के सकल घरेलु उत्पाद में करता है
    उद्योग और विनिर्माण क्षेत्रो के बृद्धि दर में भी गिरावट देखने को मिली है जिससे पूरी संरचना गड़बड़ा गयी है
    परिणामतः हमारी अर्तव्यवस्था मंडी की तरफ अग्रसर होती नज़र आ रही है
    इसके संभावित परिणाम –
    आर्थिक बिषमता बढ़ेगी
    हमारे देश में आ रही निवेश घटेगी
    अर्थव्यव्ष्ठ चरमरा सकती है
    प्रति व्यक्ति आय घटने के साफ-साफ आसार दिख रहे है
    सामाजिक संतुलन बिगड़ेगा
    राजनितिक व कूटनीतिक रूप से हमारे अस्तित्व को झटका लग सकता है
    देश में बेरोजगारी बढ़ाने से लोगों में रोष पैदा हो सकता है और वो भटक सकते है

    उपाय-
    सरकार द्वारा बनाये गए योजनाओ का सही ढंग से लागु होना
    जमीनी स्तर पर बदलाव की जरुरत
    बाजार में पैसे की मात्रा को बढ़ाना जिससे मांग बढ़ेगी तो उत्पादन भी बढ़ेगा तो रोजगार भी बढेगा क्यूँ की सब एक दूसरे के पूरक है
    मेक इन इंडिया को सफल बनाना अन्यथा हम बहुत बड़े क्रेता बन कर रह जायेंगे,बिक्रेता कभी नहीं बन पाएंगे और खुद पे निर्भर होने का हमरा उद्देश्य अधूरा रह जायेगा
    कृषि के तरीके को आधुनिक बनाना और उद्योग व विनिर्माण बृद्धि दर को 10 से ज्यादा करना जिससे ज्यादा लोगो को रोजगार मिले
    निष्कर्ष-
    आज भारत का स्थान सकल घरेलु उत्पाद के बृद्धि दर में जहाँ विश्व मव सबसे ज्यादा है वहीँ पूरी दुनिया की नजर हमारे ऊपर है क्यों की ज्यादातर देश आज मंडी की मार झेक रहे है.इसलिए भारत निवेश का हब बनता जा रहा है अतः हमें ये बृद्धि बना कर रखनी होगी तब जेक हम आर्थिक शक्ति बन पाएंगे और इसके अलावा हम किसी और की कामना नहीं कर सकते.

  • Rahul Mishra

    पिछले फाइनैंशल इयर के मुकाबले 2016-17 में सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) की रफ्तार कम रहने का अनुमान लगाया गया है । सरकार की तरफ से शुक्रवार को जारी अनुमानों के मुताबिक, 2016-17 की अवधि के लिए जीडीपी विकास दर 7.1 प्रतिशत रहेगी। साल 2015-16 में यह 7.6 प्रतिशत थी। जीडीपी के अलावा इस वित्‍त वर्ष में प्रति व्यक्ति आय की विकास दर में भी गिरावट का अनुमान जताया गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की 6.2 फीसदी की तुलना में इस साल 5.6 फीसदी रह सकता है।
    कुछ सकरात्मक परिणाम भी देखने को मिले है।
    1.2016-17 के दौरान प्रति व्यक्ति कुल आय में 10.4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का अनुमान है
    2.कृषि, वानिकी और मत्स्य क्षेत्रों में विकास दर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
    3.प्रति व्यक्ति मूल्य संवर्धन की क्षमता बढ़ेगी।
    चूंकि इसमे नोटबंदी के महीनो(नवम्बर- दिसम्बर)को नही गिना गया है । अतः कम ग्रोथ रेट के कारण
    1. वैश्विक बाजार में उथलपुथल
    2. ब्रेक्सीट का प्रभाव
    3. अमेरिकी चुनाव के कारण वाल स्ट्र्रेट जर्नल में उथल पुथल
    आगे की राह:
    आगे क़े रह कठिन प्रतीत होते है लेकिन कुछ सकरात्मक परिणाम भारत सरकार के द्वारा उठाए गए है जिससे अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे
    1. बैंको के पास पैसे आ जाने से वो ज्यादा से ज्यादा पैसे मार्किट में उतरेंगे
    2. गुड्स एंड सर्विस कर प्रणाली आने से जीडीपी को 2 % बढ़ने का अनुमान है
    3. 2017 में वदेशी प्रत्यक्ष निवेश में बढ़ोतरी के अनुमान है।
    4. टैक्स तो जीडीपी अनुपात बढ़ने से इकॉनमी को रफ्तार मिलेगी।
    5. बजट आने से रफ़्तार की।सम्भावनाए
    वर्ष 2017 बड़ी सम्भावनाए के साथ साथ चुनोतियाँ भी लाएगी अत: हमारी अर्थव्यवस्था को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।

    • Devanampriya Priyadarsi

      1 आपने बाहरी प्रभाव को बताया है (बहुत बढ़िया)
      लेकिन आतंरिक प्रभाव को भी बताएं
      2 कृषि में हो रहा वृद्धि दर भी सकरात्मकता के रूप में लिख सकते है
      बाकि सब आपका उत्तर बहुत बढ़िया
      kwkr..

      • Rahul Mishra

        कृषि का जिक्र किए है सर जी।
        थैंक्यू फ़ॉर revewing

    • Vishwender

      no such need to write exact data…you will not able to remind and recall in mains exam
      few internal factors like slump in infrastructure projects which demands more steel and iron,over protectionism in private sector investment now a days

      • Rahul Mishra

        Thanku for reviewing ..i mentioned it..keep reviewing

  • Rahul Mishra

    Urban development ministry’s decision to ban the motor vehicles in inner line of CP of Delhi is welcome step. What other steps can be taken to decongest the cities in different states?
    बढ़ती जनसंख्या एवं अव्यवस्थित शहरों की संरचना ने हाल के दिनों में कुछ भीड़-भाड़ वाले शहरों की यातायात व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब कर दी है।
    हाल ही में भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्ली के कनॉट प्लेस के अंदर क्षेत्रों में मोटर वाहनों पर प्रतिबंध लगाया है जो स्वागत योग्य कदम है ।
    अलग अलग शहरों में सारी भीड़ कम करने के लिए उठाए जा सकने वाले कदम :-
    1. मेट्रो स्टेशन से शहरी एवं भीड़ भार वाले बाजार तक सरकार के ही वाहनों को परमिट दी जाए ।उदहारण- लंदन में प्रमुख बाजारों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही प्रयोग होता है ।

    2. ट्रैफिक पुलिस को अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाए जिससे वह अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित कर सके 3. एक व्यवस्थित पार्किंग क्षेत्र की स्थापना हो जो भीड वाले बाजार से 500 मीटर की दूरी पर हो
    4. ड्रोन तकनीक का प्रयोग कर ट्रैफिकिंग को नियंत्रित किया जा सकता है
    5. अधिक से अधिक लोगों को कार पूलिंग की शिक्षा दी जाए
    6. अधिक से अधिक लोगों को ट्रैफिक रुल की शिक्षा दी जाए ।
    7. भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में ओवर ब्रिजों का निर्माण किया जाए
    8. सोशल मीडिया के द्वारा ट्रैफिक को कनेक्ट कर भीड़ की संदेश लोगों तक पहुंचाया जाए
    9. वर्किंग आवर को फ्लेक्सिबल किया जाए जिससे लोगों के भीड़ में कमी आएगी
    10.ग्रामीण क्षेत्रो से लोगो का पलायन कम किया जाए एवम ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान दी जाय

    ट्रैफिक की समस्या भी उन बड़ी समस्याओं की सूची में आती है जिनकी तरफ हमने आज़ादी के बाद बहुत कम ध्यान नहीं दिया है।
    आज जरूरत है इसकी संस्थागत विकास की जिसके के प्रति हम आशान्वित हैं।

    • Devanampriya Priyadarsi

      very good attemp

    • Vishwender

      very good answer….few more points
      1] there should be real time monitoring data of public transport available to citizens
      2] there should be integrated travel card for seamless travel in every mode of public transport
      3] there should be easy online mode of booking through mobile app for public transport like uber,ola are using such apps
      4] e-riksha should be promoted so that pollution can be checked as well
      5] last mile connectivity should be boost

    • ranjan

      very good answer .
      few points….
      government is trying to regulate the mob where as requirement is to rationalize the need of the mob
      public transports are to be used more vigorously and culture for the same must be developed by endorsing such practice like the PM in uk travels by bicycle and metro.
      Smart city projects need to be adopted in letter and spirit.
      making more flyovers and roundels ease the burden but better way of rationalising the traffic is to sort the vehicles and use bypasses for commercial and heavy vehicles.

      • Rahul Mishra

        Indeed.. thanku for reviewing..

        • rajan chatrola

          On more point you should add
          Using IT service, GIS, MIS we can develope application which can indicate real time traffic on mobile.

  • Devanampriya Priyadarsi

    Indian diaspora is disturbed into different parts of the world. Although it advances India’s interest in foreign countries but faces a lot of challenges also. Comment
    ans–

    भारतीय प्रवासी बिस्व के लगभग 160 देशों में निवास करते है आजादी के पहले से ही चाहे वह ग़दर पार्टी हो या अन्य ऐसे संगठन , आजादी दिलवाने में महत्वपूर्ण योगदान दिए ,ये प्रारंभ से ही भारत से जुड़े रहे है इस कारन इनके हित से भारत का भी हित जुड़ा हुआ है
    भारतीय प्रवासी को मुख्यतः दो वर्गों में बाटा जाता है — अरब देशों में रहने वाले
    और पश्चिमी देशों में रहने वाले
    इन दोनों वर्गों इसे भारत को को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कई फायदे होते है –
    1 भारत के विदेश पूंजी कोष में वृद्धि होता है
    2 भारत सामरिक सम्बन्ध दो विरोधी देशों के साथ बन पाते है ()
    3 भारत के सांस्कृतिक सामाजिक .और शैक्षिक संबंधों में इन देशों के साथ प्रगाढ़ता आती है । हमारे सम्बन्ध अमेरिका से अच्छे हो रहे है इसमें प्रवेश भारतीय ,या भारतीय मूल के लोगों के योगदान को नही नकारा जा सकता ॥
    लेकिन आज के समय में ये प्रवासी भारतीय विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं
    1 अरब देशों में —
    a- शैल गैस के प्रभाव में आ जाने के कारन बहुत सारे भारतीय श्रमिक बेरोजगार हो रहे है
    b- इन देशों में अरबीकरण (देशीयकरण ) के चलते भी इनपर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है
    c- अरब देशों में प्रचलित काफला व्यवस्था से भारतीय श्रमिकों के साथ दास जैसा बर्ताव होता है , इनपर
    नजर रखने के लिए एक ख़ास तरह के व्यक्ति होता है ,जिसके अनुमति के मिलने के बाद ही वे अपने देश
    लौट पाते है
    2 पश्चिमी देशों में —
    a- नश्लीय भेदभाव तथा इसकी वजह से कभी कभी जान का भी खतरा ऑस्ट्रेलिया में देखने को मिला
    b- यूरोपीय देशों के संरक्षणवादी नीतियों से बेरोजगारी बढ़ने की संभावनाए बढ़ रही है उदा-ब्रेक्सिट, दक्षिणपंथ के उदय
    c- यूरोप में शिक्षा प्राप्त करना बहुत खर्चीला हो गया है
    d- H1-B वीजा के नियमावलियों में जटिलता को बढ़ाना आदि
    सुझाव — प्रवासीय भारतियों के समस्यायों को ध्यान में रख के ही अंतराष्ट्रीय सहयोग परिषद् की स्थापना की गयी , हाल में भारत ने विभिन्न आपरेशन जैसे —राहत,संकटमोचन चलाये जो प्रसंसनीय है , PIO का OCI के साथ विलय भी इस क्षेत्र में एक बेहतर कदम है साथ ही साथ भारत को एक स्थायी और संस्थागत व्यवस्था अपनाने के जरुरत है इससे इनके समस्याओं का स्थायी समाधान हो पायेगा और अंतरास्ट्रीय सहयोग परिषद् जैसे संस्थानों को और सदृढ़ करने की जरुरत है

    • Rahul Mishra

      Also write about indian diaspora in Africa..
      How they support india africa relation ..becoz china is already present here and her problem…kuch chutna nhi chahea…..haha
      Well wriiten

      • Devanampriya Priyadarsi

        hahhaahah
        world limit ka bhi dhyan rakhna hoga
        thanks for reviewing…….

        • Vishwender

          you can add one more point how NRI is taking part in elections and becoming members of parliament.Also forming cultural organization in countries….very well written

          • Devanampriya Priyadarsi

            yes,
            both points could be added…
            thanks
            keep reviewing

    • aditi

      you have mentioned all the relative points,very well written.

      • Devanampriya Priyadarsi

        thanks ..
        keep reviewing…..

  • Rahul Mishra

    हरित बांड:-
    1. पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल कारोबार और संपत्ति वित्त
    2. अति महत्वपूर्ण वित्तीय प्रणाली जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को हरित भविष्य की ओर ले जाएगी
    यह पहली बार बहुपक्षीय विकास बैंकों ( विश्व बैंक और यूरोपीय निवेश बैंक) के द्वारा पहली बार 2007 में लाई गई थी।
    – भारत में पहली बार हरित बांड यस बैंक और भारत सरकार की सहायता से फरवरी 2015 में जारी किया गया था।(हरित मसाला बांड)
    – भारत विश्व की 7 वीं सबसे बड़ी हरित बांड जारी करने वाली देश है।

    हाल के कुछ कदम:-
    1. बांड के प्रति वित्तीय संस्थानों संप्रभु एवं नगर निगम के द्वारा भागीदारी देखी गई ह
    2. वैश्विक बाजारों में कई देशों द्वारा हरित बांड के साथ-साथ मुद्रा हरित बांडों की भी नवीन संरचना का प्रभाव उदाहरण- भारत एवं चीन में हरित बांड जारी करने में तेजी से विकास एशियाई बाजारों में हरित बांड के अंतरिक्ष के क्षेत्रों में प्रभाव
    3. रियो प्लस 20 में हरित अर्थव्यवस्था के लिए हरित बांड की चर्चा
    जलवायु परिवर्तन के हल के रूप में:-
    1. हरित बांड भारत सरकार की बहु प्रतिक्षित सोलर मिशन एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर वित्त लगा रही है
    2. 62 %जलवायु हरित बांड के माध्यम से अक्षय ऊर्जा पर सहयोग दे रही है।
    3. विकसित राष्ट्रों के द्वारा 100 बिलियन डॉलर राशि देने में हरित बांड कारगर साबित होगी
    4.रियो +20, एवम संपोषणीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।
    5 भारत में राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा को भारत सरकार के हरित बांड से जोड़ने में बात चल रही है।
    हरित बांड आज के बदलते वैश्विक पर्यावरणीय परिदृश्य को वित्तीय सहायता प्राप्त कराने में एक कारगर हल हो सकती है जिस पर विश्व के कई राष्ट्र एवं बैंकों के द्वारा पहल जा रही है।

    • divya kumari

      nice points

  • divya kumari

    how to post picture here.. i m new here

  • Vishwender
  • Abhishek
  • Abhishek
  • SINHAVAHINI SINGH
  • Ankur yadav

    A Green bond is a fixed income instruments for the purpose of raising debt capital through markets.it certifies that the proceeds will be used exclusively for specific “green” purpose.
    What are its benefits?
    >green bonds enhances an issuer’s reputation as it helps in showcasing their commitments towards sustainable development.
    >with an increasing focus of foreign investors towards green investments(after paris agreement) it could also help in reducing the cost of capital.

    What are the avenues where these funds can be invested?
    >SEBI’s indicatives list include renewable and sustainable energy such as wind and solar,clean transporatation,sustainable water management,climate change adaption,energy efficiency,sustainable waste management and land use and biodiversity conservation.

    Why are green bonds important for india?
    >india has big goals in terms of renewable energy installations,but a big hurdle has been financing and the cost of financing.
    >green bonds may be able to fill this gap.
    >green bonds typically carry a lower interest rate than the loans offered by the commercial banks,hence,when compared to other forms of debt,green bonds offer better returns for an independent power producers.
    >green bonds can provide a long term source of debt capital for renewable infrastructure projects.

    what are the risks and challenges?
    >CERTIFYING A GREEN BOND=guidelines issued by the international capital market association are lacking in specifics,leading to a lack of consensus on what classifies as a green bond.
    >THERE COULD ALSO BE A CURRENCY RISK=the downside is that green bonds in india have a shorter tenor period of about 10years in india where as a typical loan would be for minimum 13years.this is less when compared to many international issuances.

    CONCLUSION-
    >fossils fuels have always enjoyed huge subsidics throughout their history and have contributed to environmental degredation and global warming,it is now apt that clean energy initatives get equitable treatment.
    >collective participation of regulators,policymakers,corporate and financial institutions is going to be crucial in pushing frontiers of green bonds further,unleashing new oppurtunites in addressing climate change.

    • Ankur yadav

      plz review

  • panakj

    Sir, please
    discus in bothe language hindi and english

  • khushboo srivastava

    Not even demonetization effect is counted, the data of just 7 months shows a GDP slightly slow down and the forecasting of GVA is also slow as compared to previous year.
    Mining and quarrying is estimated to shrink much as compared to previous year. The basic serviceslike electricity, gas, water supply and other utility services which shows the collective indicator of broader economic activity is slowing down. The two air blower of the economy since independence on which most of the economy depends is manufacturing sector and service sector, they are also losing their momentum.
    But according to the Finance minister and CSO projected the growth could accelerate this year. As india’s agriculture is still largely depended upon the monsoon . And monsoon will be good in this year, so there is a big hope in this demonetization year also. Agriculture, fisheries and forestry sector is estimated to expand also. Not only good monsoon is the only hope, there is an increased in sowing area also, which will resultant in strong growth in output.

  • vishesh

    A great step being taken by Urban Development Ministry by banning the motor vehicles in inner line of CP in Delhi as pilot project for 3 months.
    As we can see in our day today’s life, its very difficult to walk freely over pavements or ride a bicycle in city either because of limited space or no space causes injuries or accidents. Design of cities by state or local bodies failed to provide these services or by encroachments causing no space for public to walk freely.
    Example Times square in New York, which reduced number of injuries. central avenues in Madrid,etc.
    Apart from these Government should encourage people to use bicycles or public transport, and to avoid cars within the city limits(so as to use only for longer distances), This is an innovative idea even to clean air and environment reducing health problems and to curb the problem of pollution, a major challenge for global countries, encourages people to go for exercises or morning walks improves their health which increases productivity in work leads to economic development, availability of food plazas too attract more people improves local economy,
    A great initiative is a begging step encourages many states to think about unclogging cities by funding for walking, cycling, and emission free public transport encouraging for clean and green environment.

  • sudhir kumar
  • sudhir kumar

    Bros please evaluate my given answer

  • kundan

    4.What are green bonds? How green bonds may be important tools to curb the climate change?
    हरित बांड(Green bonds)वैसे बांड होते है जिसे निकलते समय यह वादा किया जाता है कि इसके माध्यम से अर्जित धन का उपयोग हरित परियोजना(Green projects) में किया जायेगा।यह बांड निम्न माध्यमो से जलवायु परिवर्तन में सहायक हो सकता है।
    1.चूँकि नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में ज्यादा धन की जरूरत होती है तो इसके वित्तीयन के रूप में।
    जैसे:-भारत का 2022 175GW ऊर्जा का उत्पादन नवीकरणीय स्रोतों से जिसकी अनुमानित खर्च $200 billion,नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए UDF द्वारा फ्रांस में तथा world bank द्वारा इंडोनेशिया जैसे देशों निर्गत किया गया हरित बांड जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और GHGs के उत्सर्जन में कमी आयेगी।
    2.कम कार्बन उत्सर्जन करनेवाले परिवहन एवं भवनों के वित्तीयन के रूप में जो CO2 के उत्सर्जन में कमी लायेगी।
    3.जल एवं कचरा प्रबंंधन जैसे परियोजनाओं के वित्तीयन के रूप मे।
    4उपरोक्त क्षेत्र में R&D को funding करने में ताकि उनके कीमतों में कमी आए एवं उसके उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
    5.IFC द्वारा निर्गत किया गया forest bond(एक प्रकार का हरित बांड) जिससे वनोन्मूलन में कमी आयेगी।
    SDG एवं पेरिस समझौता के लक्ष्यों के प्रप्ति में हरित बांड का एक महत्पूर्ण योगदान हो सकता है और भारत जैसे वित्त से कमी से जूझ रहे राष्ट्र उदयीमान हरित बांड बाजार का अधिक से अधिक उपयोग कर सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहलू जोड़ सकते है।

  • Vishwender

    friends please read letter to editor section daily because it contains many innovative ideas and points by reader

  • Madhu Smita

    Answer Kese likh ke de

  • Madhu Smita

    Can we present the answer in English ?